शनिवार, 18 जुलाई 2009

अहसास

हजरत अली के पास एक नौकर था । एक दिन वह किसी बात पर अपने मालिक से नाराज हो गया और नौकरी छोड़ कर चला गया । कुछ दिनों बाद हजरत अली जब मस्जिद में नमाज पढ़ने गए तो नौकर भी चुपचाप उनके पीछे-पीछे वहां पहुंचा और तलवार निकाल कर उन पर वार कर दिया । हजरत अली को काफी चोट आई । कुछ लोगों ने उन्हें उठाया और उपचार करने लगे तथा कुछ लोगों ने दौड़ कर उस नौकर को पकड़ लिया | वे उसे हजरत अली के सामने ले आए । इतने में हजरत अली को प्यास लगी । उन्होंने पानी मांगा, लोग दौड़े गए और शरबत ले आए। गिलास में जब शरबत हजरत अली के सामने पेश किया गया तो उन्होंने नौकर की ओर इशारा करके कहा- ''मुझे नहीं, पहले इसे पिलाओ, देखते नहीं, कितना थक गया है, कितनी बुरी तरह हांफ रहा है ।''
लोगों ने नौकर की ओर गिलास बढ़ाया । उसकी आंखों से आंसू बहने लगे । हजरत अली ने बड़े प्यार से कहा- ''भाई, रोओ मत । गलती हम सब से हो जाती है। शरबत पी लो ।''
नौकर उनके पैरों पर गिर पड़ा और अपने किए की माफी मांगने लगा । हजरत अली ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा- ''मेरे प्यारे भाई, जो अपनी गलती को जान लेता है और भविष्य में गलती न करने का फैसला कर लेता है, वह जिंदगी में बहुत उंचा उठ जाता है ।

6 टिप्‍पणियां:

mehek ने कहा…

sahi bahut prernadayak kahani.

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

प्रेरणास्पद कहानी

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

सुन्दर एवं शिक्षाप्रद कहानी के लिए आभार.....

Udan Tashtari ने कहा…

आभार इस प्रेरणादयक कथा के लिए.

अनिल कान्त : ने कहा…

प्रेरणादायक कहानी ....

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

ओम आर्य ने कहा…

urja de gayee aapaki kahani .....sundar