सोमवार, 24 मई 2010

मूल्यवान

इंग्लैण्ड की महारानी विक्टोरिया ने एक बार विएना के प्रसिद्ध पियानोवादक को अपने महल में बुलाया । उसका मधुर संगीत सुनकर महारानी खुश हो गई । आखिर में उन्होंने आस्ट्रिया का राष्ट्रगीत सुनने की इच्छा जाहिर की । राष्ट्रगीत पूरा होने तक महारानी खड़ी रही । पियानोवादक की खुशी की सीमा न रही । उसने अपने मित्रों से कहा, ''महारानी ने पुरस्कार के तौर पर मुझे हीरे का जड़ाउं हार दिया । लेकिन मेरे राष्ट्रगीत के सम्मान में उनका खड़ा होना मेरे हार से मूल्यवान था।''

5 टिप्‍पणियां:

'उदय' ने कहा…

...बहुत सुन्दर,प्रसंशनीय!!!

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन प्रसंग दिया!!

चन्द्र कुमार सोनी ने कहा…

खुद इज्ज़त पानी हैं तो दूसरो की इज्ज़त करनी ही होगी.
बहुत बढ़िया सीख दी हैं आपने.
हार्दिक आभार.
WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

Prerak prasang...sadhuwad.

mastercard casino ने कहा…

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