शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

प्रसिद्ध लेखक

अंग्रेजों का जमाना था । अंग्रेज गवर्नर ने प्रसिद्ध लेखक प्रेमचंद को रायसाहब की उपाधि देने की घोषणा की। प्रेमचंद यह सुनकर परेशान हो गए । उनकी पत्नी ने कहा,'' इसमें परेशान होने की क्या बात है? जब उपाधि मिल रही है तो लेनी चाहिए ।''
प्रेमचंद ने कहा, ''अभी तक मैं जनता के लिए लिखता था । लेकिन फिर सरकार के पक्ष में लिखना होगा।''
उन्होंने गवर्नर को लिखा, ''मुझे जनता का रायसाहबी मंजूर है, सरकार का नहीं ।''

3 टिप्‍पणियां:

चन्द्र कुमार सोनी ने कहा…

bahut achchhi seekh di hain.

main to khud munshi ji ke saahitya kaa fan-mureed hoon.

thanks.

WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

aarkay ने कहा…

kaash aisa swaabhiman aaj bhi dekhne ko milta .