रविवार, 20 सितंबर 2009

रक्षक

एक बार स्वामी रामतीर्थ जापान गए । वहां उनका खूब सत्कार हुआ । उन्हें एक स्कूल में निमंत्रित किया गया । स्कूल का दौरा करने के दौरान जाने क्या सोच कर स्वामी रामतीर्थ ने नन्हें विद्यार्थी से पूछा, ''तुम किस धर्म को मानते हो ? ''बौद्ध धर्म को |'' विद्यार्थी ने उत्तर दिया । स्वामी जी ने फिर प्रश्न किया, ''हात्मा बुद्ध के बारे में तुम्हारे क्या विचार हैं ?'' विद्यार्थी ने झट उत्तर दिया, ''बुद्ध तो भगवान हैं ।'' यह कहकर उसने मन ही मन बुद्ध का ध्यान कर अपने देश की प्रथा के अनुसार बुद्ध को प्रणाम किया ।
तब स्वामी जी ने उस विद्यार्थी से पूछा, ''तुकन्फ्युशियस के बारे में क्या कहोगे?'' विद्यार्थी ने श्रद्धा भाव से कहा, '' कन्फ्युशियस एक महान् संत थे।'' उसने बुद्ध की तरह कन्फ्युशियस का ध्यान कर उसे भी प्रणाम किया। स्वामी मुस्करा कर बोले, ''अच्छा, अब मेरे एक और प्रश्न का जवाब दो,'' मान लो, अगर कोई देश तुम्हारे जापान पर आक्रमण करता है, और उसके मुख्य सेनाधिति बुद्ध या कन्फ्युशियस हों तो तुम क्या करोगे ?''
स्वामी रामतीर्थ का यह कहना था कि विद्यार्थी का चेहरा क्रोध और जोश के मिले-जुले भाव से तमतमा उठा । वह कड़क कर बोला, ''मैं अपनी तलवार से बुद्ध का सिर काट लूंगा और कन्फ्युशियस को पैरों तले कुचल दूंगा ।'' स्वामी रामतीर्थ यह सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुए । उस बालक का उठा कर उसका मुख मंडल चूमते हुए बोले, ''जिस देश के रक्षक तुम जैसे हों, उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता ।''

2 टिप्‍पणियां:

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

वाह्! देशभक्ति का ऎसा जज्बा कि साक्षात ईश्वर भी सामने आ जाए तो उसका भी मुकाबला करने को तैयार... बहुत ही बढिया प्रसंग।।
आभार्!

संगीता पुरी ने कहा…

भारतवर्ष में ऐसे चैप्‍टरों को पढाए जाने की आवश्‍यकता है !!