शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

शिक्षा

एक बार एक लड़का स्कूल से शिक्षक का एक पत्र आया, जिसमें लिखा था ‘आप का बेटा मंद बुद्धि है । इसे पढ़ाना व्यर्थ है । अच्छा होगा कि आप इसे स्कूल से हटा लें ।’ मां ने यह पत्र पढ़ा । उसकी आंखों में आंसू आ गए । फिर भी उसने अपने पुत्र के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा,''भले ही स्कूल वाले तुम्हें न पढ़ाएं, लेकिन मैं तुम्हें पढ़ाऊंगी ।'' आखिरकार एक दिन मां की मेहनत रंग लाई और बड़ा होकर उसका बेटा विश्व का महान् वैज्ञानिक बना । उसका नाम था टामस अलवा एडीसन (1847-1931) जिस ने बल्ब का ही नहीं और भी सैकड़ों आविष्कार करके घर-घर में विज्ञान की रोशनी फैला दी ।

5 टिप्‍पणियां:

sangeeta swarup ने कहा…

प्रेरणा दायक पोस्ट....किसी को भी कम ना समझें..हर एक में कुछ अपनी विशेषता होती है

चन्द्र कुमार सोनी ने कहा…

excellent ji excellent.
bahut hi umdaa post likhi hain aapne.
i liked it.
thanks.
www.chanderksoni.blogspot.com

संगीता पुरी ने कहा…

पूत के पांव पालने में दिखते हैं .. गलत सिद्ध हुई !!

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

एक नहीं बल्कि कईं सन्देश देती हुई बेहद प्रेरणात्मक पोस्ट....
बेहतरीन!!

shama ने कहा…

Sabhi qisse bade prernadayi hain!