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मंगलवार, 9 मार्च 2010

अपराध

मुगल बादशाह बहादुरशाह जफ़र अंग्रेजों की कैद में अपने जीवन के अंतिम दिन बड़े कष्ट से बिता रहे थे । एक बार एक व्यक्ति उनसे मिलने आया। उसने बादशाह से कहा, ''आप को जो कष्ट दिए जा रहे हैं, आप उसकी शिकायत क्यों नहीं करते ?''
उन्होंने दुःख भरे स्वर में जवाब दिया, ''मेरी यही सजा है क्योंकि बादशाह होने के नाते में देश का पहरेदार था । फिर भी मैं आराम की नींद सोता रहा । समय रहते न तो मैं जागा और न ही दुश्मन को ललकारा, इससे बड़ा अपराध और क्या हो सकता है ?''