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मंगलवार, 11 जनवरी 2011

लाल बहादुर शास्त्री

लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन  
उस समय लाल बहादुर शास्त्री गृह मंत्री थे । एक बार उन्होंने इलाहाबाद स्थित अपना निवास स्थान इसलिए खाली कर दिया क्योंकि मकान मालिक को उसकी आवश्यकता थी । उन्होंने किराए पर दूसरा मकान लेने के लिए आवेदन पत्र भरा ।
काफी समय हो गया लेकिन लाल बहादुर शास्त्री को मकान नहीं मिल सका | लाल बहादुर शास्त्री के मित्र ने अधिकारियों से पूछताछ की । अधिकारियों ने बताया, शास्त्री जी का कड़ा आदेश है कि जिस क्रम में उनका आवेदन पत्र दर्ज है । उसी क्रम के अनुसार मकान दिए जाएं । कोई पक्षपात न किया जाए। सच यह था कि 176 आवेदकों के नाम पहले दर्ज थे ।

शुक्रवार, 5 नवंबर 2010

सहिष्णुता

दीवाली  की  हार्दिक  शुभकामनाएं 
उन दिनों दिवंगत लाल बहादुर शास्त्री रेल मंत्री थे । एक बार वह रेलगाड़ी में यात्रा कर रहे थे । प्रथम श्रेणी के डिब्बे में अपनी सीट पर एक बीमार व्यक्ति को लिटा कर, वह स्वयं तृतीय श्रेणी में जाकर उसकी बर्थ पर चादर ओढ़ कर लेट गए।थोड़ी देर में सो गए । कुछ समय बाद टिकट निरीक्षक आया और उन्हें सोता पाकर बुरा भला कहने लगा ।
लालबहादुर शास्त्री उसकी आवाज सुन कर जागे । जब उन्होंने टिकट निरीक्षक को अपना परिचयपत्र दिखाया तो टिकट निरीक्षक बुरी तरह घबरा गया। बोला, ''सर, आप और तीसरे दरजे में? आप चलिए, मैं आपको आपके डिब्बे में पहुंचा दूं।'' लेकिन वह मुस्कराते हुए बोले,''अरे भैया, मुझे तो नींद आ रही है।क्यों मेरी मीठी नींद खराब करते हो।'' वह फिर से चादर ओढ़ कर सो गए ।

रविवार, 7 फ़रवरी 2010

पक्षपात

उस समय लाल बहादुर शास्त्री गृह मंत्री थे । एक बार उन्होंने इलाहाबाद स्थित अपना निवास स्थान इसलिए खाली कर दिया क्योंकि मकान मालिक को उसकी आवश्यकता थी । उन्होंने किराए पर दूसरा मकान लेने के लिए आवेदन पत्र भरा। काफी समय हो गया लेकिन लाल बहादुर शास्त्री को मकान नहीं मिल सका। लाल बहादुर शास्त्री के मित्रों ने अधिकारियों से पूछताछ की । अधिकारियों ने बताया,''शास्त्री जी का कड़ा आदेश है कि जिस क्रम में उनका आवेदन पत्र दर्ज है । उसी क्रम के अनुसार मकान दिए जाएं । कोई पक्षपात न किया जाए। '' यह सच था और उनसे पहले 176 आवेदकों के नाम दर्ज थे ।