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शुक्रवार, 21 मई 2010

समय की कीमत

प्रसिद्ध चिकित्सक अमरनाथ झा समय के बड़े पाबंद माने जाते थे। एक बार वह पटना गए हुए थे। वहां साहित्यकारों की एक गोष्ठी आयोजित की गई थी । जिस में डॉक्टर झा को मुख्य अतिथि बनाया गया था । उन्होंने निमंत्रण स्वीकार कर लिया और आयोजकों से कहा कि वे निर्धारित समय यानी 6 बजे से आधा घंटा पहले किसी को उनके निवास स्थान पर भेज दें । डॉक्टर झा 5.30 बजे तैयार हो कर बैठ गए । लेकिन उनको लेने आने वाले सज्जन 6 बजे के बाद आए। आते ही वह क्षमा मांगने लगे । डॉक्टर झा ने गोष्ठी में जाने से इन्कार कर दिया । सज्जन बहुत गिड़गिड़ाए कि आपके बिना हमारी गोष्ठी असफल हो जाएगी । उन्होंने नम्रता से जवाब दिया,''आपकी गोष्ठी असफल होने का मुझे खेद है । पर देर से जाकर मुझे लेट लतीफ कहलाना स्वीकार नहीं है।