बात उन दिनों की है, जब बगदाद में खलीफा उमर थे । वह जितने इन्साफ पसंद, नेक-दिल थे, उतने ही अनुशासन प्रिय और कर्त्तव्य-परायण भी । उन्होंने शराबियों की शराब की लत छुड़ाने के लिए घोषणा की, यदि कोई व्यक्ति शराब पीता हुआ या पीये हुए पकड़ा गया तो उसे भरे दरबार में 25 कोड़े लगाए जाऐंगे । यह सुन कर शराबी घबरा गए। उन्होंने इस ऐलान की सच्चाई जानने के लिए खलीफा के पुत्र को शराब पिला कर बाजार में छोड़ दिया । उसे तुरंत दरबार में पेश किया गया । दरबारियों के समझाने के बावजूद खलीफा ने आज्ञा दी, ''अपराधी की नंगी पीठ पर 25 कोड़े लगाए जाएं ।'' इतने कोड़े खाने पर उनका पुत्र बेहोश होकर गिर पड़ा और उसने वहीं दम तोड़ दिया।