बगदाद के खलीफा का एक गुलाम था हाशम । वह बहुत बदसूरत था । सब गुलाम उसका मजाक उड़ाया करते थे । एक बार खलीफा अपने बहुत सारे गुलामों के साथ बग्घी में जा रहे थे । एक जगह कीचड़ में उनका घोड़ा फिसल गया । खलीफा के हाथ में पकड़े हीरे-मोतियों की पेटी गिर कर खुल गई। खलीपफा ने गुलामों से कहा,'' जल्दी से हीरे-मोती बीन लो । सब को इनाम दिया जाएगा ।''सुनकर सारे गुलाम हीरे-मोती बटोरने के लिए दौड़ पड़े । सिर्फ हाशम खड़ा रहा । खलीफा ने कहा, ''तुम क्यों नहीं जाते?'' उसने कहा, ''सब से कीमती हीरा तो आप हैं, मैं आप को छोड़कर क्यों जाऊं ?'' खलीफा उससे बहुत खुश हुए और उसी वक्त उसे आजाद कर दिया ।