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सोमवार, 25 जून 2012

उपयोगी

एक दिन प्रसिद्ध ब्रिटिश विचारक जान रस्किन अपने मित्र के साथ लंदन की गलियों से गुजर रहे थे । रास्ता गंदा व कीचड़ भरा था । रस्किन का मित्र बारबार नाक-भौंह सिकोड़ता व कहता कि इस गंदगी में चलने में कितना कष्ट हो रहा है ? इस पर रस्किन हंस कर बोले, ''मित्र, यदि तुम विचार करो तो पाओगे कि हम हीरा, पन्ना और जवाहरातों पर चल रहे हैं ।''
                                                उनका मित्र यह सुनकर चकित हुआ और उनकी तरफ देखने लगा । रस्किन ने आगे कहा, ''तुम्हीं बताओं कि यह काली मिट्टी क्या हैं ? क्या यह उसी खान में से नहीं निकलती है जिस में से हीरा निकलता है । इसलिए मैं कहता हूं कि इस संसार में गंदी या नाचीज कहलाने लायक कोई वस्तु नहीं है । जिसे हम लोग नाचीज समझते हैं, वह बहुधा सब से बढ़ कर उपयोगी निकल जाती है, केवल उसे अपनाने और उसे लेकर आगे बढ़ने का हौसला होना चाहिए।''

मंगलवार, 13 मार्च 2012

मित्र

अमरीका में गृह युद्ध चल रहा था । उस समय अब्राहम लिंकन राष्ट्रपति थे । एक बार वह घायलों के खेमें में गए । वहां से घूमते-घूमते वह दुश्मन सैनिकों के खेमें में भी चले गए और उन से प्यार से बातें करने लगे। जब वह बाहर निकले तो एक बुढि़या ने उनसे पूछा, ''तुम अपने दुश्मनों से इतने प्यार से क्यों बोलते हो, जब कि तुम्हें तो उन्हें खत्म कर देना चाहिए।'' अब्राहम लिंकन ने मुस्करा कर उत्तर दिया, ''क्या मैं अपने दुश्मनों का खत्म नहीं कर देता, जब मैं उनसे दोस्ती कर के उन्हें अपना मित्र बना लेता हूं।''