एक बार पंडित नेहरू से मिलने के लिए एक देश का राजदूत, एक सैनिक और एक नवयुवक आया । उन्होंने सचिव से कहा कि वह पहले नवयुवक, फिर सैनिक और सब से आखिर में राजदूत को भेजें। जब वे तीनों मिलकर चले गए । तब सचिव ने पंडित नेहरू से पूछा, ''आपने राजदूत और सैनिक से पहले नवयुवक को क्यों बुलाया, जबकि नवयुवक से पहले उन दोनों ने अनुमति मांगी थी ?'' नेहरू जी ने मुस्कराते हुए जवाब दिया, नवयुवक ही देश के कर्णधार हैं। वही बड़े होकर सैनिक बनेंगे और वही युवक विदेशों से संबंध बनाएंगे । चूंकि दो देशों के बीच संबंध उनके नागरिकों की भावनाओं के आधार पर बनते हैं । इसलिए मैंने युवक को राजदूत और सैनिक से पहले बुलाया ।''
सोमवार, 17 मई 2010
रविवार, 16 मई 2010
ब्लॉग संचार
हिन्दी ब्लॉग जगत के प्रचार और प्रसार के लिए हम सभी के द्वारा प्रयासों की आवश्यकता है। क्योंकि विश्व स्तर पर तथा ब्लॉग जगत में हिन्दी का स्थान अभी अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। एतदर्थ हिन्दी ब्लॉग टिप्स के सुझाव के अनुसार एक ब्लॉग एग्रीगेटर बनाया है ‘‘ब्लॉग संचार’’। आपसे अनुरोध है कि अपने ब्लॉग को यहां शामिल करें और दूसरों को भी शामिल करने के लिए कहें।
शुक्रवार, 14 मई 2010
सिफारिश
इंग्लैण्ड के एक मंत्री के निवास पर एक सिपाही रात को गश्त लगा रहा था । मंत्री की पत्नी को उसके जूतों की आवाज के कारण नींद नहीं आ रही थी । आखिर, उन्होंने अपने पति से इसकी शिकायत की । मंत्री ने सिपाही को बुला कर कहा, ''कोठी के सामने गश्त मत लगाओ, नींद में बाधा पड़ती है ।'' सिपाही ने जवाब दिया, ''लेकिन मेरे अफसर ने मुझे यही आज्ञा दी है ।''
''क्या तुम मेरी भी नहीं मानोगे ?'' सिपाही ने इन्कार कर दिया । अगले दिन सिपाही ने यह सोच कर अपना सामान बांध लिया कि अब उसकी नौकरी नहीं रहेगी । लेकिन तब उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा, जब उसके अफसर ने आ कर सूचना दी कि मंत्री महोदय ने उसकी तरक्की के लिए सिफारिश की है ।
''क्या तुम मेरी भी नहीं मानोगे ?'' सिपाही ने इन्कार कर दिया । अगले दिन सिपाही ने यह सोच कर अपना सामान बांध लिया कि अब उसकी नौकरी नहीं रहेगी । लेकिन तब उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा, जब उसके अफसर ने आ कर सूचना दी कि मंत्री महोदय ने उसकी तरक्की के लिए सिफारिश की है ।
मंगलवार, 11 मई 2010
अभिमान
जब सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया था तो उसी दौरान उसकी मुलाकात एक साधु से हुई थी । जब सिकंदर उसके पास पहुंचा तो वह धूप का आनंद ले रहा था । साधु की बातचीत से प्रभावित हो कर सिकंदर ने पूछा,''महाराज, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूं?'' उसने कहा,''तुरंत यहां से चले जाओ ।''
सिकंदर को ऐसे उत्तर की आशा नहीं थी । वह क्रोधित होकर बोला, ''क्या आप जानते हैं कि मैं वह सिकंदर हूं, जो कुछ भी कर सकता है।'' साधु ने शांत भाव से कहा,''यदि ऐसा है तो मुझे मार कर फिर से जिंदा कर दो।'' साधु की यह बात सुनकर सिकंदर का सिर शर्म से झुक गया ।
सिकंदर को ऐसे उत्तर की आशा नहीं थी । वह क्रोधित होकर बोला, ''क्या आप जानते हैं कि मैं वह सिकंदर हूं, जो कुछ भी कर सकता है।'' साधु ने शांत भाव से कहा,''यदि ऐसा है तो मुझे मार कर फिर से जिंदा कर दो।'' साधु की यह बात सुनकर सिकंदर का सिर शर्म से झुक गया ।
सोमवार, 3 मई 2010
शब्दों का असर
बगदाद के खलीफा का एक गुलाम था हाशम । वह बहुत बदसूरत था । सब गुलाम उसका मजाक उड़ाया करते थे । एक बार खलीफा अपने बहुत सारे गुलामों के साथ बग्घी में जा रहे थे । एक जगह कीचड़ में उनका घोड़ा फिसल गया । खलीफा के हाथ में पकड़े हीरे-मोतियों की पेटी गिर कर खुल गई। खलीपफा ने गुलामों से कहा,'' जल्दी से हीरे-मोती बीन लो । सब को इनाम दिया जाएगा ।''सुनकर सारे गुलाम हीरे-मोती बटोरने के लिए दौड़ पड़े । सिर्फ हाशम खड़ा रहा । खलीफा ने कहा, ''तुम क्यों नहीं जाते?'' उसने कहा, ''सब से कीमती हीरा तो आप हैं, मैं आप को छोड़कर क्यों जाऊं ?'' खलीफा उससे बहुत खुश हुए और उसी वक्त उसे आजाद कर दिया ।
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