अमरीका के प्रथम राष्ट्रपति जार्ज वाशिंगटन के समय की पाबंदी का विश्व भर में उदाहरणस्वरूप प्रयोग किया जाता है । वह समय का मूल्य जानते थे । अतः सदैव अपने एक एक पल का सदुपयोग करते थे । एक बार उन्होंने अपने कुछ मित्रों को भोजन पर निमंत्रित किया । समय दिन के 3 बजे का था। संयोगवश मेहमान समय पर नहीं आए तो उन्होंने भोजन करना शुरू कर दिया । कुछ ही मिनटों की देरी से आने वाले मेहमानों को यह देख कर बहुत बुरा लगा। जार्ज वाशिंगटन ने कहा, ''क्षमा कीजिए । खाना मेज पर लगाने से पूर्व मेरा रसोइया मुझ से यह नहीं पूछता कि मेहमान आए या नहीं वह केवल यह पूछता है कि समय हुआ या नहीं?'' उनकी यह बात सुनते ही मेहमान लज्जित हो गए।
मंगलवार, 17 मई 2011
सोमवार, 2 मई 2011
आत्म-विश्वास
उन दिनों पेले फुटबाल के नए-नए खिलाड़ी के रूप में उभरे थे । एक बार वह एक जगह मैच खेलने गए । मैच के दौरान उन्होंने एक बाल गोल पोस्ट पर दागी परंतु गोल नहीं हुआ तब उन्होंने शर्त ठोंक दी, ''मैंने 300 के कोण से बाल मारा और गोल हुआ कैसे नहीं ?'' जबरदस्त विश्वास था उनके कथन में और जब पोल नापा गया तो पोल सचमुच टेढ़ा था ।
रविवार, 10 अप्रैल 2011
सहनशीलता
सुकरात यूनान के महान विचारक और दार्शनिक थे । वह सड़क पर जहां भी खड़े हो जाते, लोग उन्हें घेर लेते और उन से तरह तरह के प्रश्न पूछते । कभी कभी तो लोग बेसिरपैर के प्रश्न भी पूछ बैठते, किंतु सुकरात शांत भाव से उन प्रश्नों का उत्तर देते रहते । लोगों से घिरे रहने के कारण सुकरात अधिक् समय तक घर से बाहर ही रहते । इस से उनकी पत्नी बेहद नाराज रहती । वैसे भी वह बड़े कठोर स्वभाव की स्त्री थी । अकारण ही सुकरात से झगड़ती रहती ।
एक बार किसी बात को लेकर वह उनसे झगड़ रही थी । सुकरात बड़े शांत भाव से उसे सुन रहे थे । जब काफी देर हो गई और उनकी पत्नी का बोलना बंद न हुआ तो सुकरात उठ कर बाहर जाने लगे । यह देखकर उनकी पत्नी का क्रोध और भी बढ़ गया । पास ही गंदे पानी से भरी बाल्टी रखी थी । क्रोध से तिलमिलाते हुए उसने सारा गंदा पानी सुकरात के उपर उड़ेल दिया । वह उपर से नीचे तक भीग गए और कपड़े भी गंदे हो गए । पर वह शांत रहे - जैसे कुछ हुआ ही न हो । थोड़ी देर बाद मुस्करा शांत भाव से सुकरात ने कहा, ''इतने भीषण गर्जन के बाद वर्षा तो होनी ही चाहिए थी।''
रविवार, 20 मार्च 2011
सफलता
होली के शुभ अवसर पर जापान और आप सभी के लिए शुभकामना।
विख्यात अंग्रेजी नाटककार आस्कर वाइल्ड का लिखा पहला नाटक सफलता नहीं पा सका। लोगों ने उनकी प्रतिक्रिया जानने लिए उनसे कहा कि कहिए कैसा रहा आपका नाटक ? प्रत्युत्तर में वे आत्मविश्वास से बोले ''नाटक तो सफल रहा ,पर दर्शक असफल हो गए।''
रविवार, 20 फ़रवरी 2011
कर्म का महत्तव
एक बार एक गरीब किसान ने गौतम बुद्ध से अपने गांव आने का आग्रह किया। बुद्ध उस गांव में पहुंचे तो सारे गांव के लोग उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़े, लेकिन उसी दिन बुद्ध को गांव बुलाने वाले किसान के बैलों की जोड़ी कहीं खो गई । किसान अब दुविध में फंस गया कि वह महात्मा बुद्ध का प्रवचन सुनने जाए या अपने बैलों को खोजे । काफी सोचने के बाद उसने अपने बैलों को ही ढूंढ़ने का निर्णय किया ।
घंटों भटकने के बाद कहीं जा कर उसे अपने बैल मिले । थकामांदा किसान घर आते ही भोजन कर के सो गया । अगले दिन वह संकोच के साथ बुद्ध के पास गया । बुद्ध उसकी परेशानी समझ गए और बोले, ''मेरी नजर में यह किसान ही मेरा सच्चा अनुयायी है । इसने उपदेशों से अधिक कर्म को महत्त्व दिया है । अगर कल यह अपने बैल खोजने न जाता और यहां आ कर मेरा प्रवचन सुनने लगता तो इसे मेरी कही हुई बातें समझ में नहीं आतीं, क्योंकि इस का मन कहीं और भटक रहा होता । इसने कर्म को महत्त्व दे कर सराहनीय कार्य किया है।''
घंटों भटकने के बाद कहीं जा कर उसे अपने बैल मिले । थकामांदा किसान घर आते ही भोजन कर के सो गया । अगले दिन वह संकोच के साथ बुद्ध के पास गया । बुद्ध उसकी परेशानी समझ गए और बोले, ''मेरी नजर में यह किसान ही मेरा सच्चा अनुयायी है । इसने उपदेशों से अधिक कर्म को महत्त्व दिया है । अगर कल यह अपने बैल खोजने न जाता और यहां आ कर मेरा प्रवचन सुनने लगता तो इसे मेरी कही हुई बातें समझ में नहीं आतीं, क्योंकि इस का मन कहीं और भटक रहा होता । इसने कर्म को महत्त्व दे कर सराहनीय कार्य किया है।''
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